CREST घोटाले में बड़ी कार्रवाई: 75 करोड़ रुपये फंड डायवर्जन मामले में पूर्व CEO नवनीत श्रीवास्तव गिरफ्तार
Major action in CREST scam
Major action in CREST scam: चंडीगढ़ की सरकारी संस्था क्रेस्ट में करीब 75 करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी एवं संस्था के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नवनीत श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया है।
बैंक फ्रॉड और फंड डायवर्जन से जुड़े इस पूरे प्रकरण में यह पहली ऐसी गिरफ्तारी है, जिसने जांच को सीधे शीर्ष प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा दिया है। सीबीआई ने आरोपी अधिकारी को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, क्रेस्ट के आईडीएफसी बैंक स्थित खातों से करोड़ों रुपये विभिन्न शेल कंपनियों में स्थानांतरित किए गए और बाद में उनका इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने यह कार्रवाई की है। सीबीआई का दावा है कि कथित अपराध से जुड़े धन का एक हिस्सा ऐसी निजी कंपनी तक भी पहुंचा, जिसमें आरोपी अधिकारी की पत्नी और एक करीबी रिश्तेदार निदेशक हैं। श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी में बेचैनी देखने को मिल रही है। बुधवार को सुबह एक आईएएस के यहां सीबीआई रेड की अफवाहें भी रहीं। हालांकि संबंधित अधिकारी ने इसका खंडन किया।
क्रेस्ट केस से आगे बढ़कर बड़े नेटवर्क पर नजर
सूत्रों के अनुसार सीबीआई की जांच अब केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है। एजेंसी समान प्रकृति के उन मामलों की भी पड़ताल कर रही है जिनमें सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों से कथित रूप से फर्जी लेन-देन के जरिए बड़ी रकम निकाली गई। हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक फ्रॉड मामले की जांच भी सीबीआई के पास है। इस मामले में राज्य सरकार के आठ विभागों के खातों से लगभग 560 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
हरियाणा कैडर के अधिकारियों पर भी नजर
नवनीत श्रीवास्तव हरियाणा कैडर के अधिकारी हैं, हालांकि उनकी गिरफ्तारी उस अवधि से जुड़ी है जब वे चंडीगढ़ प्रशासन की संस्था क्रेस्ट में सीईओ के रूप में कार्यरत थे। हरियाणा के बैंक फ्रॉड मामलों की जांच के दौरान भी कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आ चुके हैं। करीब एक दर्जन आईएएस अधिकारी जांच एजेंसी की रडार पर हैं। इससे पहले जांच के दौरान हरियाणा के तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के परिसरों पर भी तलाशी अभियान चलाया जा चुका है। ऐसे में श्रीवास्तव की गिरफ्तारी को जांच के नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।
बैंक खातों से शेल कंपनियों तक पहुंचा पैसा
क्रेस्ट मामले की जांच में सीबीआई को पता चला कि संस्था के चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी बैंक शाखा में संचालित तीन खातों से धनराशि कथित रूप से शेल कंपनियों में स्थानांतरित की गई। एजेंसी के अनुसार इससे संस्था को करीब 75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि कथित अपराध से अर्जित धन का एक हिस्सा ऐसी निजी कंपनी तक पहुंचा, जिसमें श्रीवास्तव की पत्नी और एक करीबी रिश्तेदार निदेशक के रूप में जुड़े हुए हैं। इसी पहलू को जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
पहले ही जेल पहुंच चुके हैं कई आरोपी
मामले में इससे पहले क्रेस्ट के तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल और अकाउंटेंट साहिल कुक्कड़ को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और वे न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई पहली चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों को नामजद कर चुकी है। इनमें निजी बैंक के पांच अधिकारी, क्रेस्ट के दो कर्मचारी, दो शेल कंपनियां, उनके निदेशक और एक निजी व्यक्ति शामिल हैं।
ब्यूरोक्रेसी में बढ़ी बेचैनी
श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा और चंडीगढ़ की नौकरशाही में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां अब केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया और निगरानी तंत्र की जवाबदेही भी तय करने की दिशा में बढ़ रही हैं। सीबीआई अब रिमांड के दौरान वित्तीय लेन-देन की स्वीकृतियों, निगरानी व्यवस्था, लाभार्थियों के नेटवर्क और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की गहन पड़ताल करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियों से इंकार नहीं किया जा सका।
आर्थिक अपराध शाखा से सीबीआई तक पहुंचा मामला
शुरुआत में इस मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस के आर्थिक अपराध थाना द्वारा की जा रही थी। बाद में मामले की गंभीरता और वित्तीय लेन-देन के व्यापक दायरे को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद बैंक रिकॉर्ड, कंपनी दस्तावेज, डिजिटल ट्रांजेक्शन और लाभार्थियों के नेटवर्क की विस्तृत जांच शुरू की। इसी प्रक्रिया में कई नए तथ्य सामने आए, जिन्होंने जांच को शीर्ष प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा दिया।